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क्या भगवा आतंकवाद के नाम पर सिर्फ राजनीति हुई

ये सवाल इसलिए, क्योंकि कोर्ट के इस फैसले के बाद देश में एक बार फिर से भगवा आतंकवाद पर राजनीति गरमा गई है। बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और पूरे मामले पर कांग्रेस से माफी मांगने को कहा। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि आज कांग्रेस के चेहरे से मुखौटा उतर गया है। कांग्रेस जिस तरह हिन्दू आंतकवाद के नाम पर हिन्दू धर्म को बदनाम कर तुष्टिकरण की राजनीति करने का काम कर रही थी, उसका आज पर्दाफाश हो गया है।

उधर बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द गढ़ने को लेकर पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम को निशाने पर लिया और उन पर केस दर्ज करने की मांग की है। लेकिन इसके उलट कांग्रेस और AIMIM ने तो NIA की जांच पर ही सवाल उठा दिए। कांग्रेस ने जहां कहा कि जांच एजेंसी केंद्र सरकार की कठपुतली बन गई है। वहीं औवैसी ने NIA को बहरा और अंधा तोता करार दे दिया।

आपको बता दें कि 18 मई 2007 को हुए इस ब्लास्ट में 9 मारे गए थे, जबकि 58 घायल हुए थे। इस घटना के बाद भगवा आतंकवाद को लेकर खूब बहस हुई थी। पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने अगस्त 2010 में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि देश के कई बम धमाकों के पीछे भगवा आतंकवाद का हाथ है। भगवा आतंकवाद देश के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहा है। इतना ही नहीं साल 2013 में कांग्रेस के जयपुर अधिवेशन के दौरान भी तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे हिंदू आतंकवाद/सैफरन टेरर का इस्तेमाल किया था। लेकिन जैसे ही एनआईए कोर्ट ने मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया, बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल गया।

 

 

 

 

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