चुनाव

कर्नाटक में लिंगायत को लेकर कांग्रेस को कौन सा डर सता रहा है ?

कर्नाटक में लिंगायत समुदाय का कितना प्रभाव है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस समुदाय को लुभाने के लिए कांग्रेस और बीजेपी हर हथकंडे अपना रही है। बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाले इस समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश कर, सिद्धारमैया ने बीजेपी को बैकफुट पर धकेल दिया था, लेकिन अब बीजेपी ने इस समुदाय को लुभाने के लिए बीजेपी ने भी एक बड़ा दांव चल दिया है।

दरअसल बीजेपी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की जो दूसरी लिस्ट जारी की है, उसमें लिंगायत फैक्टर का पूरा ख्याल रखा गया है। बीजेपी की इस लिस्ट में 82 प्रत्याशियों के नाम हैं। मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी ने अपनी इस लिस्ट में लिंगायत समुदाय के 31 लोगों को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा मैसूर इलाके में प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय को भी इस लिस्ट में तवज्जो मिली है।

वहीं कांग्रेस भले ही लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश कर लिंगायत समुदाय को साधने की पूरी कोशिश की। इसका असर हुआ कि लिंगायत समुदाय के करीब 200 मठों ने चुनाव में सिद्धारमैया को समर्थन देने का एलान भी किया था। लेकिन अब कांग्रेस को भीतर ही भीतर एक अजीब डर सता रहा है। यही वजह है कि लिंगायत/वीरशैव को दर्जा दिए जाने को लेकर सिद्धरमैया सरकार के भीतर ही विभाजन पर कांग्रेस अब इस मुद्दे पर सतर्कता बरत रही है। पार्टी को लगता है कि या तो ये मुद्दा पार्टी के लिए काम कर सकता है। या फिर उसपर हिंदू समुदाय को बांटने का आरोप लग सकता है।

आपको बता दें कि कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की करीब 17 फीसदी आबादी है। जिसका प्रभाव सूबे की 100 सीटों पर खासकर उत्तरी कर्नाटक में माना जाता है। यही वजह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल अपने-अपने हिसाब से लिंगायत समुदाय को जुटाने में जुटे हैं। लेकिन किसकी कोशिशें रंग लाती हैं, ये तो चुनाव बाद ही पता चलेगा।

 

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