अजब गजब

देश के कई राज्यों में कैश की किल्लत की असली वजह क्या है ?

आखिर कहां गायब हो गया एटीएम से नकदी ?

एटीएम के बाहर लोगों के लाइन में लगी ये तस्वीर उस वक्त की है, जब मोदी सरकार ने नोटबंदी का एलान किया था। उस वक्त देश भर में नकदी की भारी किल्लत हो गई थी। लोगों को थोड़े से कैश के लिए कई दिनों तक लाइन में लगना पड़ा था। अभी वो दौर गुजरे बहुत दिन नहीं बीते हैं, लेकिन एक बार फिर से कुछ-कुछ वैसे ही हालात बनते नजर आ रहे हैं।

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में बीते कई सप्ताह से जारी कैश की किल्लत, अब दूसरे राज्यों में भी देखने को मिल रही है। अब पूर्वी महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात से भी नकदी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं दिल्ली-NCR में भी लोगों को एटीएम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यहां तक कि गुड़गांव में 80 फीसदी एटीएम कैशलेस हो गए हैं।

उधर लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए रिजर्व बैंक और सरकार को सामने आना पड़ा। रिजर्व बैंक के सूत्रों की मानें तो अब अर्थव्यवस्था में नकदी की हालत नोटबंदी के पहले वाले दौर से भी बेहतर है, ऐसे में इस संकट की वजह दूसरी है। रिजर्व बैंक के सूत्रों के मुताबिक इन राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से ये संकट खड़ा हुआ है। रिजर्व बैंक की इस दलील को दूसरे बैंक भी तस्दीक करते नजर आ रहे हैं।

बैंकों की मानें तो ये संकट जमाखोरी के चलते पैदा हुआ है। आरबीआई के डेटा के मुताबिक 6 अप्रैल को 18.2 लाख करोड़ रुपये की करंसी सर्कुलेशन में थी, जो नोटबंदी से पहले प्रचलित मुद्रा के लगभग बराबर था। हालांकि कैश की इस किल्लत को बैसाखी, बिहू, सौर नव वर्ष जैसे त्योहार और कर्नाटक चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सरकारी सूत्रों की मानें तो इस संकट से निबटने के लिए वित्त मंत्रालय ने तत्काल रिजर्व बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक की है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक कैश की आपूर्ति सामान्य हो गई है और हालात जल्दी ही सामान्य हो जाएंगे। लेकिन अचानक हुई नकदी की कमी से लोगों को नोटबंदी वाला दौर जरूर याद आ गया।

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