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राहुल गांधी की इफ्तार पार्टी से क्यों गायब रहे दिग्गज नेता ?

कांग्रेस की कमान संभालने के बाद राहुल गांधी की ओर से दी गई पहली सियासी इफ्तार को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं थीं। एक तो ये कि इसमें विपक्षी एकता दिखेगी या नहीं और दूसरी प्रणब मुखर्जी आएंगे या नहीं। संघ के कार्यक्रम में जाने के बाद पूर्व राष्ट्रपति को लेकर पार्टी में असहज स्थितियां बनी थीं, लेकिन राहुल की इफ्तार में पहुंचकर प्रणब ने सारी चर्चाओं पर विराम लगा दिया। हालांकि इफ्तार पार्टी से दिग्गज नेताओं की दूरी बनाने से विपक्षी एकता के फ्रंट पर कांग्रेस को झटका जरूर लगा है।

खबर थी कि राहुल की इस इफ्तार पार्टी के लिए 18 विपक्षी दलों के सभी बड़े नेताओं को न्योता भेजा गया था। कांग्रेस के सहयोगी दल इफ्तार में शरीक तो हुए, लेकिन पार्टी की फर्स्ट लाइन लीडरशिप की बजाए सेकंड लाइन के नेताओं को भेजा गया। सीपीएम के सीताराम येचुरी और जेएमएम नेता हेमंत सोरेन को छोड़ दिया जाए, तो दूसरे दलों के पार्टी चीफ राहुल की इफ्तार पार्टी में नहीं पहुंचे। डीएमके की तरफ से कनिमोझी और जेडीयू के निष्कासित नेता शरद यादव इफ्तार में मौजूद रहने वाले दूसरे प्रमुख नेताओं में से एक रहे।

मजेदार बात तो ये है कि इसमें कई ऐसे नेता भी नहीं पहुंचे, जो साल 2015 में सोनिया गांधी की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए थे। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी शामिल हैं। इसके अवाला एसपी प्रमुख अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरएलडी के अजीत सिंह, बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और बीएसपी सुप्रीमो मायावती शामिल भी राहुल के इफ्तार में नहीं आए।

हालांकि अपनी इफ्तार पार्टी को राहुल गांधी ने शानदार जरूर कहा। इफ्तार के बाद अपने एक ट्वीट में राहुल ने लिखा-

अच्छा खाना, दोस्ताना चेहरे और शानदार संवाद ने इसे यादगार इफ्तार बना दिया. दो पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा और प्रतिभा पाटिल व कई दलों के नेता, मीडिया, राजनयिक और कई पुराने एवं नए दोस्त शामिल हुए।

अब राहुल जो भी कहें, लेकिन उनकी इफ्तार पार्टी से विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने जिस तरह से किनारा कर लिया, उससे चर्चा का बाजार भी गर्म है।

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