राजनीति

क्या 2019 में अकेले चुनाव लड़ने का मन बना रही हैं मायावती ?

क्या किसी मजबूरी में हैं बीएसपी सुप्रीमो ?

कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण के दौरान एक मंच पर विपक्षी नेताओं की जो तस्वीर सामने आई थी, उससे 2019 में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को बल मिला था। लेकिन महज एक महीने के भीतर ही समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। खासकर मायावती ने जिस तरह मध्य प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का एलान किया है और 2019 को लेकर भी चुप्पी साध रखी है, उससे उनके अकेले चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

सियासी जानकारों की मानें तो बीएसपी सुप्रीमो मायावती के लिए इस बार राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जगह बनाने का सुनहरा अवसर है। तभी वे ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। वे यूपी से इतर दूसरे राज्यों में भी पार्टी के विस्तार की कोशिशों में जुटी हैं। उन्होंने कांग्रेस के असर वाले राज्यों में भी ज्यादा सीटों पर लडऩे का ऐलान करके कांग्रेस पर दबाव बढ़ा दिया है।

इतना ही नहीं मायावती जिस तरह से 2019 में सीटों को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रही है, उसको लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि मायावती किसी मजबूरी में या दबाव की वजह से गठबंधन की राजनीति से दूर हो रही हैं। खबर तो यहां तक है कि वे यूपी में भी किसी महागठबंधन के विचार से दूरी बना रही हैं। इसकी एक बानगी कैराना उपचुनाव में भी देखने को मिला। हालांकि इस सीट पर आरएलडी प्रत्याशी की जीत तो हो गई, लेकिन मायावती ने न तो अपने कार्यकर्ताओं से आरएलडी को वोट देने की अपील की और न ही नतीजे आने के बाद कोई उत्साहजनक प्रतिक्रिया ही दी।

मायावती ने मध्य प्रदेश में सभी 230 सीटों पर लड़ने का एलान कर दिया है। वहीं उन्होंने बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी पूरे दमखम के साथ उतरने के संकेत दिए हैं। सूत्रों की मानें तो उनके ऊपर किसी तरह का दबाव है, जिसकी वजह से वे मजबूरी में अलग राजनीति कर रही हैं। जाहिर है मायावती के इस चुप्पी या यो कहें कि उनके इस रुख ने बीजेपी विरोधी पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में हर किसी की नजर मायावती के अगले कदम पर होगी।

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