राजनीति

बीजेपी में क्यों आसान नहीं है नरेश अग्रवाल की राहें ?

समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता नरेश अग्रवाल के बीजेपी में शामिल होने को अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका माना गया। लेकिन अगर नरेश अग्रवाल के अब के राजनीतिक सफर पर गौर किया जाए, तो ऐसा कहना बेमानी होगी। उल्टे उन्हेंन पार्टी में शामिल करना बीजेपी को भारी पड़ सकता है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो नरेश अग्रवाल के बीजेपी में आने से एसपी को भले ही कोई नुकसान न हो, लेकिन उनके बीजेपी में आने से पार्टी में क्लेश बढ़ना करीब-करीब तय है। बीजेपी में नरेश के चाहने वालों से ज्यादा उन्हें नापसंद करने वाले हैं। नरेश न सिर्फ हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी कर चुके हैं, बल्कि पीएम मोदी के लिए भी जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल कर चुके हैं।

बताया जा रहा है कि बीजेपी के कई ऐसे बड़े नेता हैं, जिन्हें नरेश अग्रवाल फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। अग्रवाल को नापसंद करने वालों में राजनाथ सिंह, अशोक वाजपेयी जैसे नेता के उनके रिश्ते सामान्य नहीं हैं। बीजेपी में शामिल होने के पहले ही दिन, उन्हें अपने एक बयान के लिए सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी सरीखे नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ा।

वैसे भी नरेश अग्रवाल की गिनती पाला बदलने वाले नेताओं में होती है। अपने चार दशक के राजनीतिक करियर में उनकी पहचान एक ‘दलबदलू’ नेता के तौर पर है। 1980 में कांग्रेस से अपना करियर शुरू करने वाले नरेश बीएसपी और एसपी होते हुए, बीजेपी में पहुंचे हैं। सत्ता के करीब रहने की उनकी आदत रही है। उनका न तो कोई जनाधार है और न ही अपना कोई वोटबैंक।

जाहिर है उनसे बीजेपी को किसी वोट का फायदा तो नहीं होगा, उल्टे पार्टी को उनकी करतूतों की वजह से किरकिरी जरूर होगी। बीजेपी में उनके आने से पार्टी भले ही खुशफहमी में हों, लेकिन उनके विवादित और बीजेपी विरोधी बयान की वजह से आने वाले दिनों में पार्टी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि नरेश अग्रवाल एसपी के लिए नहीं, बल्कि बीजेपी के लिए आफत साबित होने वाले हैं।

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