राजनीति

नीतीश कुमार के किस दांव से परेशान है बीजेपी और आरजेडी ?

आखिर नीतीश के किस तीर से अपने-पराए सभी घायल हो गए ?

बिहार के सीएम नीतीश कुमार को यूं ही राजनीति का माहिर खिलाड़ी नहीं कहा जाता है। महागठबंधन से अलग होने के बाद से ही वो जहां विरोधियों के निशाने पर थे। वहीं हाल ही में हुई कई हिंसक घटनाओं के बाद से ही उन पर बीजेपी के दबाव में काम करने के आरोप लगाए जा रहे थे। दोतरफा दबाव झेल रहे नीतीश ने मौके पर चौका मारकर, एक ही तीर से अपनों से लेकर परायों तक सभी को घायल कर दिया।

जी हां, नीतीश कुमार के हालिया राजनीतिक कदमों ने सूबे में मौजूदा सियासी समीकरण में हलचल मचा दी है। उनकी हाल की एक के बाद एक सियासी पहल से न सिर्फ विरोधी आरजेडी सतर्क है, बल्कि सहयोगी बीजेपी भी बेचैन है। हाल ही में पटना में आयोजित ‘दीन बचाओ, देश बचाओ’ रैली की सफलता के बाद इसका श्रेय नीतीश कुमार को भी गया। सूत्रों की मानें तो इस रैली को सफल बनाने में नीतीश ने भी हर तरह से सहयोग किया।

इस रैली में मुस्लिमों ने दलितों के साथ अपना गठजोड़ करने के संकेत भी दिए। ये रैली केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के साथ दलित सम्मलन करने के ठीक बाद हुई है। इतना ही नहीं इस रैली के एक दिन बाद नीतीश कुमार ने खालिद अनवर को जेडीयू से एमएलसी बनाने का ऐलान किया, जो इस रैली के प्रमुख आयोजकों में एक थे।

खबरों की मानें तो इस कार्यक्रम में नीतीश की सक्रियता कुछ बीजेपी नेताओं को नागवार गुजर रहा है। वहीं आरजेडी भी इसे अपने मुस्लिम-यादव यानि MY समीकरण में सेंध के रूप में देख रही है। प्रदेश में करीब 17 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इतना ही नहीं नीतीश दलितों को ‘महादलित’ की सारी सुविधाएं देने का ऐलान कर चुके हैं। सूबे में दलित और महादलितों की तादाद करीब 30 फीसदी है, जो पासवान और नीतीश के वोटबैंक रहे हैं।

नीतीश ने जिस तरह से दलितों और मुस्लिमों को साधने की कोशिश की है, उससे साफ है कि वो बिहार में अपनी साख खोना नहीं चाहते हैं। नीतीश के इन कदमों से इतना तो साफ है कि 2019 से पहले और सियासी सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं।

To Top
Shares