राजनीति

UPA की डिनर पार्टी से बिगड़ा NDA का जायका !

10 जनपथ पर आयोजित साल के सबसे चर्चित डिनर पार्टी में अनुमान से ज्यादा मेहमान पहुंचे, जिससे मीडिया में डिनर पार्टी से मेहमानों की दूरी को लेकर चल रही चर्चा गलत साबित हुई। सोनिया गांधी के इस डिनर से 2019 की चुनावी तैयारी में जुटी BJP का जायका जरूर बिगड़ा होगा जो विरोधी खेमें को लगातार कमजोर करने में जुटी है।

चर्चा थी की कांग्रेस की ओर से इस आयोजन के लिए करीब 17 दलों के नेताओं का आमंत्रित किया गया था लेकिन अब साफ हो चुका है की NDA विरोधी 20 दलों के प्रमुख नेता या उनके प्रतिनिधी सोनिया गांधी के आमंत्रण पर डिनर पार्टी में शामिल हुए।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने हालांकि इसे UPA की ओर से सौहार्द्र और मित्रता वाला भोज बताया है लेकिन जानकार इसे भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोकने के लिए विपक्ष एकजुटता के लिए रणनीति बनाने की कवायद बता रहे है। राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद सौंपने के बाद UPA चेयरपर्सन सोनिया गांधी की डिनर पार्टी गठबंधन को मजबूत करने की पहल बताई जा रही है।

बैठक में शामिल लोगों की जानकारी कांग्रेस पार्टी के ट्विटर हैंडल से भी दी गई

बैठक से ममता बनर्जी तो दूर रहीं लेकिन उनकी जगह सुदीप बंदोपाध्याय मौजूद रहे। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव के बजाये रामगोपाल यादव पहुंचे, मायावती ने भी दूरी बनाई लेकिन BSP से सतीश मिश्रा डिनर में शामिल हुए। इसके अलावा NCP से शरद पवार, RJD से तेजस्वी यादव और मीसा भारती, नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अबदुल्ला, झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन, CPI के डी राजा, RLD से अजित सिंह, CPM के मोहम्मद सलीम, DMK से कनिमोझी, झारखंड विकास मोर्चा प्रमुख बाबूलाल मरांडी, RSP के रामचंद्र, हिंदुस्तान अवाम मोर्चा प्रमुख जीतन राम मांझी, JDS से डॉ। के रेड्डी, AIDUF से बदरुद्दीन अजमल, IUML से कुट्टी, केरल कांग्रेस से जोश के मनी, हिंदुस्तान ट्राइबल पार्टी से शरद यादव के साथ कांग्रेस के राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, मनमोहन सिंह, एके एंटनी, रणदीप सुरजेवाला, अहमद पटेल समेत कई नेता मौजूद दिखे।

डिनर के बाद तेजस्वी यादव ने भी इसे एक दोस्ताना बैठक बताया। साथ ही बैठक को एक शुरूआत बताते हुए NDA से नाराज चल रहे सहयोगियों को साथ लाने का इशारा भी किया। तेजस्वी यादव ने कहा कि  बैठक में देश के संविधान को बचाने के लिए चर्चा की गई। केंद्र में इस समय तानाशाह सरकार है और हम इस सरकार को हटाना चाहते हैं। आज एनडीए का कोई भी सहयोगी खुश नहीं है। अकाली दल, शिवसेना, टीडीपी सभी नाराज हैं।

वैसे तो राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर दलों के गठबंधन के उलझी रणनीति ने UPA की एकजुटता को सवालों के घेरे में ला दिया था। हालांकि सभी दलों के प्रमुख तो इस बैठक में नहीं पहुंचे लेकिन उनके प्रतिनिधियों को मौजूदगी ने ये इशारा जरूर कर दिया की भले ही राज्यों में अपना दबदबा बनाये रखने के लिए छोटे दल अपने फायदे के हिसाब से दोस्त तय कर रहे हैं लेकिन जब बात 2019 के लोकसभा चुनाव की होगी तो सभी एकजुट होने से परहेज नहीं करेंगे।

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