राजनीति

कर्नाटक की सत्ता से दिल्ली की सत्ता का अपशगुनी कनेक्शन क्या है ?

कर्नाटक का ये अपशगुन मोदी-शाह के लिए खतरनाक क्यों है ?

कर्नाटक में बीजेपी और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के बीच सत्ता के लिए संघर्ष जारी है। हालांकि सबसे बड़ा दल होने की दुहाई देकर बीजेपी फिलहाल सरकार बनाने में कामयाब तो गई, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा में बहुमत साबित करना है। उधर कांग्रेस-जेडीएस का गठबंधन भी जादुई आंकड़ा होने का दावा सत्ता का असली हकदार बता रही है। लेकिन कर्नाटक में सत्ता के लिए मचे घमासान के बीच आज हम आपको एक ऐसा अपशगुन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

जी हां, कहा जाता है कि कर्नाटक में सरकार बनाने वाले दल से दिल्ली की सत्ता दूर हो जाती है। बीते दो दशक इस बात की गवाही देते हैं कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव जीतने वाली पार्टी को दिल्ली की गद्दी नसीब नहीं होती। साल 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार बनाई, लेकिन 2014 लोकसभा चुनावों में उसे इतिहास की सबसे बड़ी हार का समाना करना पड़ा।

इसी तरह 2008 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की सरकार बनी, लेकिन उसे 2004 के बाद लगातार 2009 के लोकसभा चुनावों में भी हार का सामना करना पड़ा। 2004 के कर्नाटक चुनाव में जेडीएस आई, तो उसी साल हुए लोकसभा चुनाव में उसे बुरी हार मिली। थोड़ा और आगे जाएं, तो साल 1999 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार बनाई थी। लेकिन 1999 के लोकसभा चुनाव में उसकी हार हो गई।

साल 1994 की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। तब जेडीएस ने कर्नाटक में सरकार बनाई। लेकिन साल 1998 के लोकसभा चुनाव में वो हार गई। इससे पहले 1989 में भी कांग्रेस कर्नाटक में जीती थी। लेकिन साल 1989 में लोकसभा चुनावों में उसे हार का सामना करना पड़ा।

हालांकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इसे महज संयोग मान रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने तो इसे कोरा अंधविश्वास तक करार दे दिया। लेकिन ये दुनिया जानती है कि राजनीति का ज्योतिषि और टोने टोटकों से कैसा रिश्ता रहा है। यही वजह है कि लोग कर्नाटक के इस अपशगुन को मोदी-शाह के लिए खतरनाक बता रहे हैं।

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