राजनीति

झारखंड में बीजेपी क्यों हुई आत्मघाती : जमीनी नेताओं को क्यों धकेला जा रहा है हाशिए पर ?

झारखंड में विधानसभा चुनाव आसन्न है। लेकिन उससे पहले बीजेपी में जिस तरह के आत्मधाती कदम उठ रहे हैं इससे ये सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर झारखंड में बीजेपी करना क्या चाहती है ?  हर पार्टी जहां अपने जमीनी नेताओं को आंतरिक सम्मान देकर उनका हौसला बढ़ाती है, वहीं प्रदेश बीजेपी में कुछ और ही खिचड़ी पक रही है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इससे निकट भविष्य में और आगामी चुनावों में बीजेपी को अगर बड़ा नुकसान हुआ तो ये चौंकने वाली बात नहीं होगी।

जो सबसे ताजा मामला है वो झारखंड के जमशेदपुर की राजमणी देवी का है। राजमणि देवी को जिले में बीजेपी की महिला मोर्चा का अध्यक्ष तब बनाया गया जब प्रदेश में पार्टी की संरचना थोड़ी कमजोर पड़ रही थी।

खुद राजमणि देवी के मुताबिक वो पार्टी में कभी किसी पद की अभिलाषा लेकर नहीं आई थी, पार्टी का जब महिला मोर्चा कमजोर पड़ रहा था, तब उन्हें जबरन जिला अध्यक्ष का पद दिया गया था, लेकिन जैसे-जैसे महिला मोर्चा मजबूती के साथ उभरकर सामने आने लगा, उन्हें दरकिनार कर दिया गया।

 

वैसे राजमणि देवी को पद से हटाए जाने का पार्टी में भी अंतर्कलह साफ समझा जा सकता है, जिसे आने वाले दिनों में देखा जा सकेगा। हालांकि पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता की तरह राजमणि देवी ने बताया कि उनका पार्टी छोड़ने या गुटबाजी करने का कोई इरादा नहीं है। अब वह अपना पूरा ध्यान अपने वार्ड के विकास और परिवार पर केंद्रित करना चाहती हैं।

आपको बता दें कि राजमणि देवी वार्ड पार्षद भी हैं और अपने क्षेत्र में किए गए कार्यों की वजह से काफी लोकप्रिय हैं। राजमणि देवी की लोकप्रियता का आलम ये है कि अपने इलाके में वो चाचीजी के नाम से मशहूर हैं। उनकी सरलता का आलम ये था कि भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष रहते हुए भी राजमणि देवी कभी किसी कार्यक्रम में शायद ही किसी ने मंच पर देखा हो। राजमणि देवी हमेशा ही जमीन पर बैठकर पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रही और महिला मोर्चा को सशक्त बनाने का काम करती रही।

राजमणि देवी को इस तरह पद से हटाने पर पार्टी में आतंरिक सवाल भी उठने लगे हैं। हालांकि इस सवाल पर पार्टी के बड़े नेता कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं।

हालांकि पार्टी के नेताओं ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने की बात कहीं है, लेकिन देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या राजमणि देवी बड़ी जिम्मेदारी लेने को सामने आती हैं या नहीं !

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