राजनीति

कर्नाटक में सत्ता की जंग से देशभर में क्यों आया सियासी भूचाल ?

आखिर कर्नाटक के बिहार और गोवा में कौन से साइट इफेक्ट्स हुए हैं ?

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा बनने के बाद से ही सूबे में सत्ता का खेल अपने चरम पर पहुंच गया है। सूबे के गवर्नर ने जैसे ही सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया, देश के दूसरे हिस्सों में भी इसके साइट इफेक्ट्स दिखाई देने लगे।

दरअसल कर्नाटक चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई बीजेपी के नेता बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार को सीएम पद की शपथ ले ली। राज्यपाल के इस फैसले का जहां कर्नाटक में साथ आई कांग्रेस और जेडीएस विरोध कर रही हैं। वहीं देश के दूसरे राज्यों में विपक्ष सरकार बनाने का दावा ठोकने का मन बनाया है। इसी फॉर्म्युले पर बिहार, गोवा के बाद अब पूर्वोत्तर के राज्यों मणिपुर और मेघालय की विपक्षी पार्टियां गवर्नर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा ठोकेंगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी आरजेडी के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव विधानसभा में अपने विधायकों की परेड करवाएंगे। इसी तरह गोवा में सबसे बड़े दल के रूप में रही कांग्रेस दावा पेश करने राज्यपाल के पास जाएगी। इतना ही नहीं मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी सिंह और मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा भी अपने-अपने गवर्नर से मिलने का समय मांगा है। इन राज्यों में हुए चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी रहने के बाद भी इनकी सरकार नहीं बनी।

आपको बता दें कि कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को जहां 104 सीटें मिलीं, वहीं कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटों पर जीत मिली। हालांकि कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव बाद गठबंधन कर लिया, जिसके बाद दोनों की कुल सीटें 116 हो गई, जो बहुमत से करीब 4 ज्यादा है। लेकिन गवर्नर ने सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्यौता दिया। इसी तरह गोवा में भी बीजेपी बाकी दलों के साथ साठ-गांठ कर सरकार बनाने में सफल रही थी। जबकि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सरकार नहीं बना पाई। लेकिन अब इन चार राज्यों की विपक्षी पार्टियां भी कर्नाटक की तर्ज पर दावा पेश करने जा रही है।

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