राजनीति

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले क्यों उड़ी है शिवराज की नींद ?

आखिर बैकफुट पर क्यों है शिवराज सरकार ?

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। बीजेपी जहां अपनी सत्ता बचाने की कवायद में जुटी है, तो वहीं कांग्रेस भी सूबे में अपने 15 साल वनवास को खत्म करना चाहती है। लेकिन इस सबके बीच सूबे में प्रस्तावित किसान आंदोलन को लेकर शिवराज सरकार बैकफुट पर आती दिखाई दे रही है।

दऱअसल मध्य प्रदेश के कई किसान संगठन 1 जून से लेकर 10 जून तक आंदोलन करने वाले हैं। प्रदेश में ये आंदोलन इसलिए भी अहम हो गया है, क्योंकि पिछले साल 6 जून को मंदसौर जिले में 6 किसान पुलिस की गोली से मारे गए थे। मंदसौर और उसके आसपास के जिलों में इस वजह से खास सतर्कता बरती जा रही है। जानकारी के मुताबिक मंदसौर और नीमच जिलों में पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 107-16 के तहत प्रतिबंधात्मक बॉन्ड किसानों से भरवाए गए हैं। करीब 1500 किसानों से पुलिस ने गांव-गांव जाकर बॉन्ड भरवाए हैं, जिसमें 80 साल के बूढ़े और बीमार किसान भी शामिल हैं।

सरकार की इस कवायद से सूबे के किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों के मामले में सरकार की बेचैनी किसान आंदोलन को कांग्रेस के समर्थन को लेकर भी है। हालांकि सूबे के गृहमंत्री ने ऐसे किसी भी बॉन्ड के भरवाए जाने की बात से इनकार किया है।

बीजेपी के लिए परेशानी की बात तो ये है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी किसानों के इस आंदोलन के दौरान यानी 6 जून को उसी पिपलिया मंडी में रैली करने वाले हैं, जहां छह किसान पुलिस की गोली से मारे गए थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का ये पहला शो होगा। इसलिए रैली की तैयारी पूरी ताकत से की जा रही है। शिवराज चाहते हैं कि कांग्रेस की रैली में किसान न पहुंचे, इसीलिए प्रशासन सख्ती कर रहा है। खबर है शिवराज अब खुद मंदसौर जाने वाले हैं।

आंदोलन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चल रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज कांग्रेस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सरकार पर किसानों के दमन और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उधर किसान नेता कक्का शिवराज को धोखेबाज बता रहे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें एक जून से शुरू होने वाले आंदोलन पर टिकी हैं।

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