राजनीति

क्या 2019 में सीटों का बंटवारा बनेगा NDA के लिए सिरदर्द ?

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी समीकरण के बनने-बिगड़ने का खेल शुरू हो गया है। चाहे यूपीए के सहयोगी हों, या फिर एनडीए के, हर दल अपने-अपने हिसाब से गोटी फिट करने में जुट गया है। दोनों ही गठबंधन के सहयोगी दल अंदरखाने टिकटों को लेकर अपनी दावेदारी भी पेश करनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में अगर बिहार की बात की जाए, तो यहां एनडीए सहयोगियों के बीच सीटों का बंटवारा परेशानी का सबब बन सकता है।

दरअसल बिहार के चार ऐसे दल हैं, जो फिलहाल एनडीए के हिस्सा हैं। बीजेपी और जेडीयू के अलावा राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की RLSP शामिल हैं। इन दोनों के पास लोकसभा की 9 सीटें हैं। यही वजह है कि इस बार 40 सीटों वाले बिहार में एनडीए के लिए सीटों का बंटवारा आसान रहने वाला नहीं है।

 

अगर 2014 के पहले के लोकसभा चुनाव की बात करें, तो 2004 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू और बीजेपी ने 26-14 और 2009 का चुनाव 25-15 सीटों के बंटवारे के साथ लड़ा था। हालांकि 2014 के चुनाव में दोनों की राहें अलग हो गई। उस चुनाव में बीजेपी ने अकेले 22 सीटें जीती थी। जबकि बीजेपी के नए सहयोगी एलजेपी ने 7 सीटों पर चुनाव लड़कर 6 और RLSP ने 4 सीटों में से 3 सीटों पर जीत हासिल की थी।

हालांकि गठबंधन के तमाम सहयोगी इसे आसानी से सुलझाने का दावा कर रहे हों, लेकिन ये इतना आसान भी नहीं हैं। राम विलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा पिछले चुनाव से कम सीटों पर मानेंगे, इसकी गुंजाइश कम है। उधर बीजेपी भी अपनी मौजूदा सीटों से से कोई समझौता करेगी, इसकी संभावना भी बेहद कम है। लेकिन वो पासवान और कुशवाहा की कीमत पर नीतीश को नाराज करना भी नहीं चाहेगी। ऐसे में समझौता या तो पासवान को करना होगा, या फिर कुशवाहा को। ऐसे में सीटों को लेकर एनडीए में घमासान मचना तय है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि मोदी और नीतीश इसे कैसे सुलझाते हैं।

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