राजनीति

क्या सरकार बचाने वाले अपने प्लान में कामयाब होंगे येदियुरप्पा ?

कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार रहेगी या जाएगी, इसका फैसला शनिवार शाम 4 बजे तक हो जाएगा। लेकिन इसके साथ ही बहुमत साबित करने को लेकर बीजेपी की धड़कनें भी तेज हो गई है। हालांकि बीजेपी ने सदन में अपना बहुमत साबित करने का दावा किया है। ऐसे में ये सवाल उठता है कि

आखिर बीजेपी ने कर्नाटक में कौन सा ‘डबल प्लान’ बनाया है ?

मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी फ्लोर टेस्ट के लिए मोर्चाबंदी तो कर ही रही है। साथ ही कांग्रेस के लिंगायत विधायकों पर भी डोरे डालने में जुटी है। इसका बड़ा संकेत उस वक्त मिला, जब गुरुवार को येदियुरप्पा लिंगायत मठ पहुंचे और वहां उन्होंने संत शिवकुमार स्वामी का आशीर्वाद लिया।

दरअसल बीजेपी का कई लिंगायत मठों से अच्छे ताल्लुकात हैं। कर्नाटक के इस समुदाय को पांच साल बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल हुई है। ऐसे इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि बीजेपी के खुद के प्रयास के अलावा, लिंगायत के धार्मिक नेता भी विश्वास मत के दौरान अपने समुदाय के विधायक को बीजेपी के पक्ष में वोट कराने के लिए चाल चल सकते हैं।

इसके अलावा बीजेपी के कानूनी सलाहकार दल-बदल कानून की स्टडी भी कर रहे हैं। वे इस बात का तोड़ निकालने में जुटे हैं कि कैसे विपक्षी पार्टी के विधायक बिना अयोग्य घोषित हुए सरकार बनाने में मदद कर सकते हैं। बीजेपी कानूनन विपक्षी पार्टी के धड़े को पार्टी में शामिल करने की योजना नहीं बना रही है। ये एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसके लिए जेडीएस और कांग्रेस के एक-एक तिहाई सदस्यों को अपने पक्ष में लाना होगा। हालांकि बीजेपी ने अपनी रणनीति का खुलासा नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि फ्लोर टेस्ट के दौरान विपक्षी पार्टी के विधायकों का एक भरोसेमंद हिस्सा वोटिंग से दूर रह सकता है।

बीजेपी के कानूनी जानकारों के मुताबिक विधानसभा में शपथ लेने से पहले किसी भी सदस्य पर उसके दल का निर्देश लागू नहीं होता है। जो उन्हें दल-बदल कानून से बचाती है और उनकी सदस्यता भी बरकरार रखती है। जाहिर है अगर बीजेपी की ये रणनीति काम करती है, तो फिर बीजेपी की सरकार के लिए बड़ी राहत होगी। लेकिन बीजेपी का ये डबल प्लान कहां तक कामयाब होता है, ये तो फ्लोर टेस्ट के दौरान ही पता चलेगा।

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