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बस कुछ दिन और.. फिर खुलकर खेला जाएगा IPL पर सट्टा!

क्रिकेट मैचों पर सट्टा खेलनेवालों के लिए जल्द ही खुशखबरी आ सकती है। अगर सरकार ने चाहा तो अगले आईपीएल सीज़न से भी पहले ये आपका कानूनी हक होगा कि आप सट्टा लगाएं या ना लगाएं। अब तक देश में सट्टेबाज़ी गैर कानूनी है मगर बावजूद इसके कोई भी सरकार सट्टेबाज़ी को रोक नहीं पाई । छिपते -छिपाते ये धंधा इतना बड़ा हो चुका है कि आप भरोसा नहीं कर सकेंगे।

दोहरा स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्पोर्ट्स सिक्योरिटी के मुताबिक भारत का सट्टा बाज़ार करीब 10 लाख करोड़ रुपए का है, और ये आंकड़ा सिर्फ क्रिकेट को लेकर है। इसमें दूसरे खेलों को आंकड़े जोड़ दें तो ज़ाहिर है ये और बड़ा हो जाएगा।

खेलों में सट्टेबज़ी को लेकर 21वें लॉ कमीशन ने अपनी सिफारिशें पेश कर दी हैं। इसमें क्रिकेट में सट्टेबाज़ी भी शामिल है। रिपोर्ट नंबर 276 में कमेटी ने क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को वैध करने की सिफारिश करते हुए कई बातें कही हैं। इस रिपोर्ट का नाम है- लीगल फ्रेमवर्क- गैंबलिंग एंड स्पोर्ट्स बेटिंग इंक्लूडिंग इन क्रिकेट इन इंडिया। कमेटी के मुताबिक शेयर बाज़ार की तर्ज़ पर एक मॉडल विकसित करके देश में सट्टे को कानूनी बनाया जा सकता है। इसमें सट्टेबाज़ी करनेवाले और करानेवालों से टैक्स वसूली की जाएगी। ठीक यही तंत्र शेयर बाज़ार में भी काम करता है। रिपोर्ट में लिखा है कि सट्टा खिलानेवालों को सरकार लाइसेंस जारी करे और इसके बदले उनसे टैक्स वसूले। टैक्स वसूली का यही काम ग्राहकों से भी  किया जाए। आपको बता दें कि भारत में फिलहाल घुड़दौड़ पर लगनेवाला सट्टा कानूनी है और इस पर सरकार को 28 फीसदी तक टैक्स हासिल होता है। ऐसे में अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि क्रिकेट में सट्टेबाज़ी पर भी इतना ही भारी भरकम टैक्स लगाया जा सकता है। ये कोई कहने की बात नहीं कि मोटी टैक्स वसूली सरकार के खज़ाने के लिए बेहद फायदे का सौदा साबित होगी।

फिक्की की मानें तो सट्टेबाज़ी के कानूनी होती ही सरकार सालाना 19 हज़ार करोड़ रुपए तक टैक्स वसूली कर सकती है। पड़ोसी चीन और इंग्लैंड में इस तरह का मॉडल काम कर रहा है। सरकार इस तरह के पैसे को वापस खेल सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए इस्तेमाल कर सकती है। यूं भी भारत के कई प्रदेशों में लॉटरी सिस्टम कानूनी है। कमेटी की सिफारिश है कि सट्टेबाज़ी के इस पूरे सिस्टम को कैशलेस बनाने पर ज़ोर रहेगा ताकि इसकी आड़ में ब्लैक मनी पर सट्टेबाज़ी ना की जा सके। ये भी व्यवस्था बनाई जाएगी कि कोई आदमी एक लिमिट में ही सट्टा लगा सके और एक निश्चित रकम तक का ही। इसके लिए वर्ग तैयार किए जाएँगे जो मोटे तौर पर दो होंगे.. हाई इनकम और लो इनकम।

इस व्यवस्था में सरकार इनकम टैक्स 1961 और जीएसटी एक्ट 2017 के तहत टैक्स लगा सकती है। अब सरकार के सामने चुनौती यही होगी कि वो राज्यों को इसके लिए कैसे मनाएगी। या तो केंद्र सरकार प्रस्ताव लाकर राज्यों से बात करेगी या फिर अनुच्छेद 249 या 252 के तहत कानून लाया जाएगा। यहां राज्यों के पास ये मौका होगा कि वो अपने हिसाब से सट्टेबाज़ी को लागू करें या ना करें। यहां तक कि दो अलग-अलग राज्य सट्टेबाज़ी के नियम में अपने हिसाब से फेरबदल भी कर सकते हैं। फिलहाल देश में गोवा, दमन और सिक्किम ऐेसी जगहें हैं जहां कैसिनो कानूनी तौर पर चल रहे हैं। पब्लिक गैंब्लिंग एक्ट 1976 उन्हें ऐसा करने की छूट देता है।

कमेटी ने सट्टेबाज़ी के पक्ष में अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अगर महाभारत काल में सट्टा कानूनी होता तो द्रौपदी को दांव पर नहीं लगाया जाता। इसके अलावा रिपोर्ट में प्राचीन काल में होने वाली सट्टेबाज़ी से लेकर दुनिया भर में प्रचलित सट्टेबाज़ी की व्यवस्था का हवाला विस्तार से दिया गया है।

दुनिया भर के कई देशों में सट्टेबाज़ी कानूनी है। यूरोप में स्पेन, जर्मनी , इंग्लैंड में ऑनलाइन सट्टेबाज़ी और कैसिनो कानूनी हैं, जबकि फ्रांस और आइसलैंड में ऑनलाइन कैसिनो पर बैन है मगर बाकी तरह के कैसिनो पर नहीं। कनाडा और मैक्सिको में हर तरह की सट्टेबाज़ी को कानूनी बनाया गया है, जबकि अमेरिका के कुछ प्रांतों में छूट है, जैसे नेवादा। अर्जेंटीना, पेरू, पनामा, कोस्टा रिका में भी हर तरह का सट्टा कानूनी है।

अब सरकार के सामने बड़ा सवाल यही है कि वो सट्टेबाज़ी को कानूनी बनाने के लिए कितनी तैयार है? भारतीय समाज में जुए को कभी भी अच्छी नज़रों से नहीं देखा गया और दक्षिणपंथी पार्टी बीजेपी इसे लोगों के गले कैसे उतारेगी ये उसके लिए यक्षप्रश्न है। सवाल ये भी है कि कानूनी तौर पर सट्टेबाज़ी की व्यवस्था करने में कहीं ऐसी खामियां ना रह जाएं कि इसका फायदा काले धन वाले उठाने लगें। यदि ऐसा हुआ तो विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार पर हमला करने का बढ़िया मौका मिल जाएगा।

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